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अल कुरान: आगर तुम औरो अनके पास जेन से पहिले तालाक दे दो और महर मुकर्रर करुके हो से अधा मरना हेना

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बिस्मिल्लाहिर रहमानिर्रहीम ---------- ✦ अल क़ुरान : अगर तुम औरतो को उनके पास जाने से पहले तलाक़ दे दो और महर मुक़र्रर कर चुके हो तो आधा महर देना होगा , हाँ अगर औरतें महर बखस दे या मर्द जिनके हाथ में निकाह का अक़द है (अपना हक़) छोड दे (और पूरा महर दे तो उनको इखतियार है) और मर्द लोग अपना हक़ छोड दे तो ये उनके लिए परहेज़गारी की बात है और आपस में भलाई करने को फरामोश ना करना बेशक अल्लाह तुम्हारे सब कामो को देख रहा है सुरह बक़रा (2), 237 ----------

नियिक काम की क्यूबुलियत के लियू दुआ

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बिस्मिलाहिर रहमानिरहिम -------- ✦ और जब इब्राहिम और इस्माईल अलैही सलाम बैतुल्लाह की बुनियादें उँची कर रहे थे ( तो ये दुआ पढ़ते जा रहे थे) एह रब हमसे  ये खिदमत क़ुबूल फरमा बेशक तू सुनने वाला और जानने वाला है अल क़ुरान सुरह बक़रा (2), 127 -------------

अल क़ुरान ,सुराह अल-बक़रा

अल क़ुरान : मोमीनों तुमको मक़तुलो ( जो क़त्ल कर दिए गये हैं) के बारे में क़सास का हुक्म दिया जाता है , आज़ाद के बदले आज़ाद और गुलाम के बदले गुलाम और औरत के बदले औरत (क़त्ल की जाये) . और क़ातिल को उसके भाई की तरफ से कुछ माफ़ कर दिया जाए तो दस्तूर के मुवाफ़िक़ मुतालबा करना चाहिए और उसे नेकी के साथ अदा करना चाहिए ये तुम्हारे रब की तरफ से आसानी और मेहरबानी है फिर जो उसके बाद ज़्यादती करे तो उसके लिए दर्दनाक अज़ाब है और एह अक़ल वालो क़सास में ( तुम्हारे लिए) ज़िंदगानी है ताकि तुम ( क़त्ल और खूनरेज़ी) से बचो अल क़ुरान ,सुराह अल-बक़रा (2), आयत #178-179 ---------