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रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम जब हर नमाज़ के बाद सलाम फेरते तो ये कहते की

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बिस्मिल्लाहिर रहमानिर्रहीम ------------ ✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम  जब हर नमाज़ के बाद सलाम फेरते तो ये कहते की  لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ، وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ، وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهْوَ عَلَى كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ، اللَّهُمَّ لاَ مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلاَ مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلاَ يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ  ✦ ला इलाहा इलअल्लाहु वाहदाहू ला शारिका लहू लहुल मुल्क , वा लहुल हम्द वा हुवा अल कुल्ली शयईन क़दीर  अल्लाहुम्मा ला मानीअ लिमा आतयता, वा ला मुअतीया लीमा मनाअता  वा ला यानफऊ  ज़ाअल जद्दा मिनकल जद्द. ✦ अनुवाद : अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही है ,वो तन्हा है उसका कोई शरीक नही ,  मुल्क उसी के लिए है, और उसी के लिए तमाम तारीफें हैं और वो हर चीज़ पर क़ुदरत  रखने वाला है,  एह अल्लाह जो कुछ तू देना चाहे उसे कोई रोकने वाला नही, और जो कुछ तू रोकना चाहे उसे कोई देने वाला नही और तेरे सामने दौलत वालों की दौलत कुछ काम नही आ सकती सही बुखारी, जिल्द 8, 6615 ------------

दुआ ए नूर - दिल में और बदन में नूर हासिल करने की दुआ

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बिस्मिल्लाहिर रहमानिर्रहीम ---- ✦ दुआ ए नूर - दिल में और बदन में नूर हासिल करने की दुआ ------------ ✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहु अलैही वसल्लम अपनी दुआ में ये फरमाया करते थे  एह अल्लाह , मेरे दिल में नूर पैदा कर,  मेरी नज़र में नूर पैदा कर, मेरे कान में नूर पैदा कर, मेरे दाईं तरफ  नूर पैदा कर, मेरी बाईं तरफ  नूर पैदा कर, मेरे उपर  नूर पैदा कर, मेरे नीचे पैदा कर  और मुझे नूर आता फरमा  ------------ सही बुखारी जिल्द 7, 6316 ----------

करज़, गाम, परेशानी और टूरि से बैच की दुआ

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बिस्मिल्लाहिर रहमानिरहिम ------ ✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम अक्सर ये दुआ माँगा करते थे اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْجُبْنِ وَالْبُخْلِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ، وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ  एह अल्लाह मैं तेरी पनाह माँगता हूँ  परेशानी और गम से, आज़ीज़ी और सुस्ती से , बुज़दिली और बुखल (कंजूसी) से , क़र्ज़  के चढ़ जाने से और लोगो के ग़ालिब आ जाने से सही बुखारी, 6369 ----------------

आयत अल कुर्सी की फ़ज़ीलत

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✦ आयत अल कुर्सी  की फ़ज़ीलत  --------------- ✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो कोई इसको (आयात अल कुर्सी को) सुबह पढ़ लेगा तो शाम तक शैतान से महफूज़ रहेगा और जो शाम को पढ़ लेगा वो सुबह तक शैतान से महफूज़ रहेगा  अल-हाकीम , अल तरगीब वा अल तरहीब, 1/273- सही ✦ हदीस का मफ्हुम है की जब बिस्तर पर लेटो तो आयात अल कुर्सी ( अल्लाहू ला इलाहा इल्ला हुवा अल हय्युल कय्यूम आख़िर तक ) पूरी पढ़ लेना . (इसके पढ़ने से) अल्लाह सुबहानहु की तरफ से तुम पर एक निगरान फरिश्ता मुक़र्रर रहेगा. और सुबह तक शैतान तुम्हारे क़रीब भी नही आ सकेगा.  सही बुखारी, जिल्द 3, 2311 ✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जिस शख्स ने हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयत अल कुर्सी पढ़ी तो जन्नत और उसके दरमियाँ मौत के सिवा कोई और चीज़ रुकावट नही (यानी मौत के बाद उसको जन्नत नसीब होगी) अल-सिलसिला-अस-सहिहा , 749 तबरानी अल कबीर, 6532-हसन सही अल जामे , 6464-सही ✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया सुरह बक़रा में एक ऐसी आयत है जो कुरान की सरदार है वो ज...

सोने से पहले दुआ

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बिस्मिल्लाहिर रहमानिरहिम ------------------------- ✦ हुजैफा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह साल-अल्लाहू अलैही वसल्लम   जब अपने बिस्तर पर लेट-ते तो ये फरमाते اللَّهُمَّ  بِاسْمِكَ أَمُوتُ و َأَحْيَا  (अल्लहुम्मा बिस्मिका अमुतु वा आहया) या अल्लाह, तेरे ही नाम के साथ मैं मरता हूँ और ज़िंदा रहता हूँ  सही बुखारी, जिल्द 7,  6312

अबू हुरैरा रेडियो अल्लाह उह के ज्ञापन

बिस्मिल्लाहिर रहमानिरम ------------------------ ✦ अबू हुरैरा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है मैने रसूल-अल्लाह सललाल्लाहू अलैही वसल्लम से अर्ज़ किया की या रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम मैने आपसे बहुत सी अहादीस आज तक सुनी है लेकिन मैं उन्हे भूल जाता हूँ , आप सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया अपनी चादर फैलाओ और आपने अपने हाथ से एक लप (चुल्लू) भर कर चादर में डाल दीया और फरमाया इसको अपने बदन से लगा लो, फिर मैने बदन से लगा लिया और उसके बाद कभी कोई हदीस नही भुला सही बुखारी, जिल्द 5, 3648 ---------------------

مسعود اور نبوی میرا ایک مہینہ ہے جسے آپ نے اپنے محب وطن کے عیسائیوں کے ساتھ مدعو کیا

------------  رسول اللہ ﷺ  نے فرمایا اگر میں کسی  مسلمان بھائی کے ساتھ اس کی ضرورت پوری کرنے کے لئے چلوں تو یہ مجھے اس مسجد (یعنی مسجد نبوی) میں ایک ماہ اعتکاف میں بیٹھنے سے زیادہ محبوب ہے۔ السلسلہ صحیحہ ٢٠٩ -٢    رسول اللہ ﷺ  نے فرمایا جو شخص اپنے بھائی کی ضرورت پوری کرے، اللہ تعالیٰ اس کی ضرورت پوری کرے گا۔ جو شخص کسی مسلمان کی ایک مصیبت کو دور کرے، اللہ تعالیٰ اس کی قیامت کی مصیبتوں میں سے ایک بڑی مصیبت کو دور فرمائے گا۔ اور جو شخص کسی مسلمان کے عیب کو چھپائے اللہ تعالیٰ قیامت میں اس کے عیب چھپائے گا۔  صحیح بخاری جلد ۳ ,٢٤٤٢  ------------

किसी भी मुसलमान की मदद करने का गुण

✦ रसूल-अल्लाह सलअल्लाहु अलैहि वसल्लम  ने फरमाया अगर में किसी मुसलमान भाई के साथ उसकी ज़रूरत पूरी करने के लिए चलूँ तो ये मुझे इस मस्जिद ( मस्जिद ए नब्वी) में एक महीना एतकाफ़ में  बैठने से ज़्यादा महबूब है  अल सिलसिला सहीहा  209  ✦  रसूल-अल्लाह सलअल्लाहु अलैहि वसल्लम  ने फरमाया जो शख्स  अपने भाई की ज़रूरत पूरी करे अल्लाह सुबहानहु  उसकी ज़रूरत पूरी करेगा. जो शख्स किसी मुसलमान की एक मुसीबत को दूर करे अल्लाह सुबहानहु उसकी क़यामत  की मुसीबतों में से एक बड़ी मुसीबत को दूर फरमाएगा और जो शख्स  किसी मुसलमान के ऐब (बुराईयों) को छुपाए अल्लाह सुबहानहु क़यामत में उसके ऐब को छुपाएगा. सही  बुखारी, जिल्द 3, 2442

नमाज में पाधे जेन वाला ताशहुद (अटठियायत)

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✦ तर्जुमा: तमाम इबादतें अल्लाह के लिए है और तमाम नमाजें और अच्छी बातें (भी अल्लाह के लिए है) , आप पर सलाम हो एह नबी (सलअल्लाहू अलैही वसल्लम) और अल्लाह की रहमतें और उसकी बरकतें नज़िल हों, हम पर (भी) सलाम हो  और अल्लाह के सभी नेक बन्दों पर (भी सलाम), मैं गवाही देता हूँ की अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही और गवाही देता हूँ की मुहम्मद (सलअल्लाहू अलैही वसल्लम) उसके बंदे और रसूल हैं. सही बुखारी जिल्द 2, 1202 ******* ******* इब्न अब्बास रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम हमको तशहहूद (अततहियात) इस तरह सिखाते थे जिस तरह कुरान की सूरत सिखाते थे  सुनन नसाई , 1281-सही GREE GroupM Guru Media HealthiNation Hearst Digital Media Hybrid icontext   Ignite Video ikoo IMT Independent Traveler Inneractive Innity InPowered Inspired Mobile Interactive Media Sales Interactive One InterCLICK Internet Brands iPromote IQM Kapanlagi KPI Solutions Lee Enterprise Liftoff Liquidus Local Corporation Longtail LookSmart Lotame Madhouse Mobile M...

सुरह अल-फलक़ और सुरह अन-नास

✦ आईशा रदी अल्लाहू अन्हा से रिवायत है की जब रसूल-अल्लाह सललल्लाहू अलैही वसल्लम बिस्तेर पर लेट ते तो  सुरह अल-फलक़ और सुरह अन-नास पढ़ कर अपने हाथों पर फूँकते और दोनो हाथ अपने जिस्म पर फेरते. सही बुखारी, जिल्द 7, 6319 ✦ आईशा रदी अल्लाहू अन्हा से रिवायत है की जब रसूल-अल्लाह सललल्लाहू अलैही वसल्लम जब बीमार हो जाते तो सुरह अल-फलक़ और सुरह अन-नास की सूरतें पढ़कर उसको अपने उपर दम करते फिर जब आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम की तकलीफ़ बढ़ गयी तो मैं उन सुरतो को पढ़कर आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के हाथों से बरकत की उम्मीद में आपके जिस्म मुबारक पर फेरती थी सही बुखारी, जिल्द 7, 5016 ✦ अब्दुल्लाह बिन खुबेब रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया सुबह और शाम 3 बार क़ुल हुवल्लाहू अहद (सुरह इख्लास) और मूआवज़तैन (सुरह अल-फलक़ और सुरह अन-नास) पढ़  लिया करो , ये तुम्हें (हर तरह की परेशानियो से बचाओ के लिए) काफ़ी हो जाएगी सुनन अबू दाऊद, जिल्द 3, 1643-हसन

मोमीन

✦ रसूल-अल्लाह ﷺ ने फरमाया कोई बंदा उस वक़्त तक मोमीन नही हो सकता जब तक वो चार चीज़ो पर ईमान ना ले आए अल्लाह वाहदहु ला शरीक पर,  मेरे (यानी मुहम्मद ﷺ के) अल्लाह के रसूल होने पर , मौत के बाद ज़िंदा होने पर और तक़दीर पर सुनन इब्न माज़ा, जिल्द 1, 81-सही --------- ✦ रसूल-अल्लाह ﷺ ने फरमाया कोई बंदा तब तक मोमीन नही हो सकता जब तक उसके वालिद और उसकी औलाद और तमाम लोगों से ज़्यादा उसके दिल में मेरी मुहब्बत ना हो जाए सही बुखारी, जिल्द 1, 15 --------- ✦ रसूल-अल्लाह ﷺ ने फरमाया कोई बंदा तब तक मोमीन नही हो सकता जब तक अपने भाई या पड़ोसी के लिए वही पसंद ना करने जो अपने लिए करता है सही मुस्लिम, जिल्द 1, 171 --------- ✦ रसूल-अल्लाह ﷺ ने फरमाया कोई बंदा उस वक़्त तक मोमीन नही हो सकता जब तक अच्छी और बुरी तक़दीर पर ईमान ना लाए यहाँ तक की वो ये यकीन ना कर ले की जो चीज़ उसको मिलने वाली थी वो उसको ही मिली किसी और के पास नही जा सकती थी और जो चीज़ उसको नही मिलने वाली थी वो किसी भी सूरत में उसको नही मिल सकती थी  जामिया तिरमिज़ी , जिल्द 2, हदीस 15-हसन

सब रोज़ो में अफ़ज़ल रमज़ान के बाद मुहर्रम के रोज़े हैं

✦ अबू हुरैरह रदी-अल्लाहू-अन्हु से रिवायत है की रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया सब रोज़ो में अफ़ज़ल रमज़ान के बाद मुहर्रम के रोज़े हैं जो अल्लाह का महीना है और बाद नमाज़ फ़र्ज़ के तहज्जूद की नमाज़ है  सही मुस्लिम , जिल्द 3, 2755  ✦ अबू हुरैरा रदी-अल्लाहू-अन्हु से रिवायत है की एक साहिब रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिदमत में हाज़िर होकर अर्ज़ करने लगे की रमज़ान के बाद सबसे ज़ियादा फ़ज़ीलत कौनसे रोज़ो की है तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया अल्लाह का महीना जिसे तुम मुहर्रम कहते हो.  सुनन इब्न माजा , जिल्द 1 , # 1742 - सही

इसलिए हम मुसलमान 9 मुहर्रम और 10 मुहर्रम दोनों का रोज़ा रखते हैं

 इब्न अब्बास रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम जब मदीना में तशरीफ़ लाए तो आप सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने यहूदियो को देखा की वो आशूरा के दिन (10 मुहर्रम) का रोज़ा रखते हैं, आप सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने उनसे इसका सबब पूछा तो उन्होने कहा की ये एक अच्छा दिन है इस दिन अल्लाह सुबहानहु ने बनी इसराईल को उनके दुश्मन ( फिरओन ) से निजात दिलवाई थी इसलिए मूसा अलैही सलाम ने उस दिन का रोज़ा रखा था तो आप सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया मूसा अलैही सलाम पर तुमसे ज़्यादा हक़ हमारा है, फिर आप सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने भी उस दिन रोज़ा रखा और सहाबा रदी अल्लाहू अन्हुमा को भी इसका हुक्म दिया सही बुखारी, जिल्द 3, 2004 ✦ अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की जब रोज़ा रखा रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने आशुरे के दिन (10 मुहर्रम) का और हुक़म किया इस रोज़ का, तो लोगो ने अर्ज़ की या रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ये दिन तो ऐसा है की इसकी ताज़ीम यहूद और नसारा करते हैं,तो आप सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया की जब अगला साल आएगा तो इंशा-अल...

रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फ़रमाया

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✦ रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फ़रमाया क़यामत के दिन सबसे ज़ियादा मेरी शफात उसको नसीब होगी जो सच्चे दिल से ला इलाहा इलअल्लाह कहे सही बुखारी , जिल्द 1, 99  ✦ रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फ़रमाया अगर कोई बाँदा क़यामत के दिन इस हालत में पेश हो की उसने ला इलाहा इलअल्लाह का इकरार किया हो और उस से उसका मक़सद अल्लाह सुबहानहु की खुशनूदी हासिल करना हो तो अल्लाह सुबहानहु दोज़ख की आग को उस पर हराम कर देगा  सही बुखारी , जिल्द 1, 6423 ✦ रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फ़रमाया जिसका आखरी कलमा ला इलाहा इलअल्लाह होगा वो जन्नत में दाखिल होगा  सुनन अबू दावुद , जिल्द 2, 1339-सही ------------------------

रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया

✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम  ने फरमाया हर बदमिज़ाज़ (बुरे मिजाज़ वाला) , ज़ियादा खाने वाला, मुतकब्बीर (घमंडी), बहुत ज़ियादा माल जमा करने वाला और बड़ा बखील अहल-ए-नार (दोज़ख़ियो) में से है और कमज़ोर और दबे हुए (मगलूब) लोग जन्नति हैं अल-सिलसिला-अस-सहिहा, जिल्द 1, 63 मसनद अहमद-214 /2 -सही अल-हाकीम-499 / 2  ✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया  मुसलमान एक आँत में ख़ाता है (यानी कम ख़ाता है) और काफ़िर सातों आँतो में ख़ाता है(यानी बहुत ज़्यादा ख़ाता है) सही बुखारी, 5396 -------------------

सही बुखारी, जिल्द 4, 3004

✦ अब्दुल्लाह बिन उमर रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की एक शख्स रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम की खिदमत में हाज़िर हुआ और आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम से जिहाद में जाने की इजाज़त मांगी तो आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने पूछा की क्या तुम्हारे माँ-बाप ज़िंदा हैं तो उसने कहा जी हाँ, तो आप सल-अल्लाहू अलैही वासल्लं ने फरमाया फिर तुम उनकी खिदमत करो सही बुखारी, जिल्द 4, 3004 ✦ मुआविया बिन जहिमाह रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की जहीमा रदी अल्लाहू अन्हु रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के पास आए और अर्ज़ की या रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम मैने जिहाद में शामिल होने का इरादा कर लिया है और इसके लिए मैं आपका मशवरा चाहता हू आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया क्या तुम्हारी माँ ज़िंदा है उन्होने अर्ज़ की जी हाँ तो आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया तो फिर तुम उनकी खिदमत करो क्यूंकी जन्नत मा के क़दमो के नीचे है सुनन नसाई, जिल्द 2, 1016-सही ------------------------

हज़रत अबू हुरैरा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की

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✦ हज़रत अबू हुरैरा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम  ने फरमाया की  जो शख्स हथयार से अपने भाई की तरफ इशारा करे तो फरिश्ते उस पर लानत भेजते हैं जब तक की ऐसा करने से रुक ना जाए , चाहे वो उसका सगा भाई हो.  सही मुस्लिम, जिल्द 6, 6666  ✦ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रदी अल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है की  रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जिसने हम पर हथयार उठाया वो हम में से नही है  सही बुखारी, जिल्द 8, 7070  ---------- __._,_.___

अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदी अल्लाहू अन्हु ने कहा की

✦ अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदी अल्लाहू अन्हु ने कहा की एक दिन जिब्रिल अलैही सलाम नबी सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के पास बैठे हुए थे की एक बड़े ज़ोर की आवाज़ दरवाज़ा खुलने की सुनी और अपना सिर उठाया , तो जिब्रिल अलैही सलाम ने कहा की ये एक दरवाज़ा है आसमान का जो आज खुला है और उस से पहले कभी नही खुला फिर उस से एक फरिश्ता उतरा जिब्रिल अलैही सलाम ने कहा की ये फरिश्ता जो ज़मीन पर उतरा है वो आज से पहले कभी नही उतरा और फिर उसने कहा की खुशख़बरी हो आपको दो नूरों की जो आपको ईनायत हुए हैं और ये आपके सिवा किसी और नबी को नही मिले एक सुराह फातिहा है और दूसरी सुरह बक़रा की आखरी आयतें , और जो भी हरफ़ तुम उसमें से पढ़ोगे तो उसकी माँगी हुई चीज़ तुम्हे ज़रूर मिलेगी सही मुस्लिम, जिल्द 2, 1877 ✦ अब्दुल्लाह इब्न मसूद रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जिसने सुरह अल-बक़रा की दो आखरी आयतें रात में पढ़ ली वो उसके लिए काफ़ी हो जाएगी (आफ़त से बचने के लिए) सही बुखारी, जिल्द 6, 5009

ज़ैद बिन साबित रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की

✦ ज़ैद बिन साबित रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया अगर तुम्हारे पास उहद पहाड़ के बराबर माल हो और उसको अल्लाह की राह में खर्च करो तब भी वो तुम्हारी जानिब से तब तक क़ुबूल नही किया जाएगा जब तक की तुम तक़दीर पर ईमान ना ले आओ , और जान लो की जो मुसीबत तुम्हे पहुँच गयी वो तुमसे टलने वाली नही थी , और जो मुसीबत तुम तक नही पहुंची वो तुम तक पहुँचने वाली थी ही नहीं , इसके सिवा तुम किसी और अक़ीदे पर मर गये तो जहन्नम में दाखिल होंगे सुनन ईब्न माजा , जिल्द 1, 77-सही ✦ अल-मुगिरा रदी अल्लाहू अन्हु ने मुआवीया रदी अल्लाहू अन्हु को लिखा की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम जब हर नमाज़ के बाद सलाम फेरते तो ये कहते की अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही है ,वो तन्हा है उसका कोई शरीक नही , मुल्क उसके लिए है, और उसी के लिए तमाम तारीफें हैं और वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है, एह अल्लाह जो कुछ तू देना चाहे उसे कोई रोकने वाला नही, और जो कुछ तू रोकना चाहे उसे कोई देने वाला नही और तेरे सामने दौलत वालों की दौलत कुछ काम नही आ सकती सही बुखारी, जिल्द 8, 6615