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सुराह माएदा (5) , #54

✦ अल क़ुरान : एह ईमान वालों जो कोई तुम में से अपने दीन से फिर जाएगा तो अनक़रीब अल्लाह सुबहानहु ऐसी क़ौम लाएगा की अल्लाह उनको चाहता है और वो उसको चाहते हैं, मुसलमानो पर नरम दिल होंगे और काफिरों पर सख़्त , अल्लाह की राह में जिहाद करेंगे और किसी मलामत करने वाले की मलामत से ना डरेंगे ये अल्लाह का फ़ज़ल है , वो जिसको चाहता है देता है और अल्लाह बड़ी कुशाइश वाला और जानने वाला है सुराह माएदा (5) , #54

सही मुस्लिम, जिल्द 4, 3403

✦ अल क़ुरान : एह ईमान वालो उन पाकीज़ा चीज़ो को हराम ना करो जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की हैं और हद से ना बढ़ो बेशक अल्लाह हद से बढ़ने वालो को पसंद नही करता और अल्लाह के रिज़क़ में से जो चीज़ हलाल और पाकीज़ा हो उसको खाओ और अल्लाह से डरते रहो जिस पर तुम ईमान रखते हो सुरह अल माईदा (5) , आयत 87-88 ✦ हदीस : हज़रत अनस रदी अल्लाहू अन्हु ने कहा की नबी सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के कुछ सहाबा ने नबी सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम की बीवियों से आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम की ख़ुफ़िया इबादत का हाल पूछा यानी जो इबादत आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम घर में किया करते थे तो एक ने उनमें से कहा की मैं अब कभी औरतों से निकाह नही करूँगा , किसी ने कहा की मैं कभी गोश्त नही खाऊंगा , किसी ने कहा की मैं कभी बिस्तर पर नही सोऊंगा  ( ताकि अल्लाह की ज़्यादा इबादत कर सके) आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने अल्लाह की हम्द बयान करने के बाद ख़ुतबा पढ़ा और फरमाया की क्या हाल है उन लोगों का जो ऐसा कहने लगे हैं , जबकि मेरा तो ये हाल है की मैं रात को नमाज़ भी पढ़ता हूँ और सो भी जाता हू और रोज़ भी रखता हूँ और इफ्तार भी करता हू...

सुरह अल माईदा (5) , आयत 87-88

✦ अल क़ुरान : एह ईमान वालो उन पाकीज़ा चीज़ो को हराम ना करो जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की हैं और हद से ना बढ़ो बेशक अल्लाह हद से बढ़ने वालो को पसंद नही करता और अल्लाह के रिज़क़ में से जो चीज़ हलाल और पाकीज़ा हो उसको खाओ और अल्लाह से डरते रहो जिस पर तुम ईमान रखते हो सुरह अल माईदा (5) , आयत 87-88 ✦ हदीस : हज़रत अनस रदी अल्लाहू अन्हु ने कहा की नबी सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के कुछ सहाबा ने नबी सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम की बीवियों से आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम की ख़ुफ़िया इबादत का हाल पूछा यानी जो इबादत आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम घर में किया करते थे तो एक ने उनमें से कहा की मैं अब कभी औरतों से निकाह नही करूँगा , किसी ने कहा की मैं कभी गोश्त नही खाऊंगा , किसी ने कहा की मैं कभी बिस्तर पर नही सोऊंगा  ( ताकि अल्लाह की ज़्यादा इबादत कर सके) आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने अल्लाह की हम्द बयान करने के बाद ख़ुतबा पढ़ा और फरमाया की क्या हाल है उन लोगों का जो ऐसा कहने लगे हैं , जबकि मेरा तो ये हाल है की मैं रात को नमाज़ भी पढ़ता हूँ और सो भी जाता हू और रोज़ भी रखता हूँ और इफ्तार भी करता हू...